Sitamarhi News: सीतामढ़ी शहर को जाम से निजात दिलाने वाली 2.9 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का निर्माण एक बार फिर विभागीय फाइलों में उलझ गया है। एक दिसंबर से काम शुरू होने की घोषणा के बावजूद अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। विभागीय स्तर पर लंबित दावे-आपत्तियों ने पूरे निर्माण कार्य को रोक दिया है। शहर की लाइफलाइन मानी जाने वाली यह सड़क पिछले 25 सालों से बदहाल है। 20 नवंबर को निरीक्षण के दौरान डीएम रिची पांडेय ने साइट की स्थिति, मौजूदा ट्रैफिक व्यवस्था और निर्माण के सभी पहलुओं की गहन समीक्षा की। उन्होंने बुडको के इंजीनियर को साफ तौर पर निर्देश दिया कि जल्द से जल्द सड़क निर्माण कार्य शुरू किया जाए। इंजीनियर ने बताया कि आचार संहिता लागू होने के कारण मुख्यालय में टेंडर मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी हो रही है। डीएम ने बुडको के इंजीनियर को मुख्यालय से समन्वय स्थापित कर लंबित प्रक्रियाओं में तेजी लाने का निर्देश दिया। उन्होंने 1 दिसंबर, 2025 तक काम शुरू करने का निर्देश दिया।
स्थानीय निवासी सोनू साह, साकेत कुमार, रंजीत कुमार और कृष्णा देवी का कहना है कि सड़क की हालत इतनी खराब है कि बड़े हादसे आम बात हैं। ऑटो-रिक्शा हर दिन हादसे का शिकार होते हैं, और जब बसें इस रास्ते से गुजरती हैं तो बस यात्रियों को जानलेवा चोटें लगती हैं। निवासियों को भी काफी परेशानी होती है।
शहर में बन रही रिंग रोड इमरजेंसी में बड़ी लाइफलाइन साबित होगी। एम्बुलेंस, फायर ब्रिगेड और दूसरी इमरजेंसी सेवाओं को शहर के अलग-अलग हिस्सों तक पहुंचने में कोई रुकावट नहीं आएगी। इसके अलावा, निवासियों को बाहरी इलाकों तक आसानी से पहुंचने में मदद मिलेगी। इससे निवासियों का आने-जाने का समय कम होगा। इससे बाहरी इलाकों और आसपास के इलाकों में बिजनेस और आर्थिक गतिविधियां भी बढ़ेंगी।
ध्यान दें कि NOC प्रोसेस को लेकर काफी विवाद हुआ था। उस समय के म्युनिसिपल कमिश्नर प्रमोद कुमार पांडे और उस समय के MLA डॉ. मिथिलेश कुमार ने देरी के बारे में डिपार्टमेंट को कई बार लिखा था, वहीं डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) ने भी ज़रूरी NOC जारी करने के लिए डिपार्टमेंट को कई बार लिखा था। इसके बावजूद, डिपार्टमेंट लेवल पर फाइल आगे नहीं बढ़ रही थी, जिससे कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं हो पा रहा था।
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शहर की बढ़ती आबादी और ट्रैफिक के दबाव को देखते हुए, 1980 के दशक में कारगिल चौक से चक महिला बस स्टैंड, पासवान चौक, गणिनाथ गोविंद मंदिर और अंबेडकर चौक तक 2.9 किलोमीटर लंबी रिंग रोड बनाई गई थी। इसका मकसद शहर के अंदर के इलाकों में ट्रैफिक जाम को कम करना था। यह रिंग रोड कई सालों तक अपना मकसद पूरा करती रही। रीगा, परसौनी, सूपी, बैरगनिया, शिवहर, मेजरगंज, मोतिहारी और जिले के दूसरे इलाकों से आने-जाने वाले वाहनों को शहर के भीड़भाड़ वाले हिस्सों से बचते हुए इस पर आना-जाना बहुत आसान लगा। लेकिन कभी मरम्मत न होने की वजह से पिछले पच्चीस सालों में सड़क पूरी तरह से खराब हो गई है। सड़क के किनारे बड़े-बड़े गड्ढे, टूटता हुआ डामर और गड्ढे ने हालत इतनी खराब कर दी है कि यह सफर के बजाय जोखिम भरा काम बन गया है।
BUIDCO के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर अशोक कुमार ने बताया कि फाइनेंशियल ईयर 2025-2026 में काम शुरू हो जाएगा। टेंडर प्रोसेस और टेक्निकल बिड पूरी हो चुकी है। क्लेम और ऑब्जेक्शन के लिए सात दिन का समय दिया गया है। उसके बाद फाइनेंशियल ईयर के 10 दिन बाद काम शुरू होगा। यह देखना दिलचस्प होगा कि इस बार जनता को रिंग रोड का तोहफा मिलता है या यह फाइलों में ही दबा रह जाता है।





