---Advertisement---

Munger Bus Stand: 30 लाख मासिक राजस्व के बाद भी बस स्टैंड बदहाल

On: November 26, 2025 4:24 PM
Munger Bus Stand: 30 लाख मासिक राजस्व के बाद भी बस स्टैंड बदहाल
---Advertisement---

Munger Bus Stand: मुंगेर में बिहार स्टेट रोड ट्रांसपोर्ट कॉर्पोरेशन का मेन सरकारी बस स्टैंड बदहाली और अनदेखी की निशानी बन गया है। अजीब बात है कि हर महीने लगभग 30 लाख रुपये की कमाई होने के बावजूद, यहां का इंफ्रास्ट्रक्चर खराब होता जा रहा है। यात्रियों को पीने का पानी, टॉयलेट और सफ़ाई जैसी बेसिक ज़रूरतों के लिए भी जूझना पड़ता है। ज़िम्मेदार डिपार्टमेंट की सालों की अनदेखी और आधे-अधूरे सुधार की कमी ने इस बस स्टैंड को लगभग खंडहर बना दिया है।

पीने के पानी और टॉयलेट की गंभीर समस्या
बस स्टैंड के अंदर यात्रियों के लिए पीने के पानी या टॉयलेट की कोई सुविधा नहीं है। यात्रियों को बोतल वाला पानी खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जबकि उन्हें पास के म्युनिसिपल टॉयलेट में अपनी टॉयलेट की ज़रूरतें पूरी करने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। यह स्थिति न केवल यात्रियों पर पैसे का बोझ डालती है, बल्कि महिला यात्रियों के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन जाती है। कई महिलाओं ने शिकायत की है कि लंबी यात्राओं के दौरान उन्हें यहां रहने में असहज महसूस होता है, क्योंकि सुरक्षित और साफ़ टॉयलेट की कमी उनके लिए एक गंभीर समस्या है।

गंदगी और बदबू से परेशानी और बढ़ जाती है
बस स्टैंड के आस-पास की गंदगी और बदबू से माहौल बर्दाश्त से बाहर हो जाता है। कूड़े का सही तरीके से डिस्पोज़ल न होने की वजह से हर जगह कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। बारिश के मौसम में हालात और खराब हो जाते हैं, जब पानी भरने से कीचड़ फैल जाता है, जिससे यात्रियों को फिसलन भरी ज़मीन पर चलना पड़ता है। बदबू की वजह से कई यात्री बस का इंतज़ार करने के बजाय सड़क किनारे या पेड़ के नीचे खड़े रहना ज़्यादा सुरक्षित समझते हैं।

खराब पैसेंजर शेड और टूटी हुई छत
पैसेंजर शेड की हालत इतनी खराब हो गई है कि इसकी छत रेगुलर गिरती रहती है। इससे कोई बड़ा हादसा होने का इंतज़ार कर रहा है। खतरे के डर से यात्री अब शेड के नीचे खड़े होने से बचते हैं और पेड़ों की छांव में बसों का इंतज़ार करते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बिल्डिंग की सालों से मरम्मत नहीं हुई है। 1965 में बनी बस स्टैंड की बिल्डिंग अब पूरी तरह से खराब हो चुकी है, लेकिन डिपार्टमेंट सिर्फ़ कुछ समय के लिए ही काम चला रहा है।

कर्मचारियों को भी होती है परेशानी
सिर्फ़ यात्रियों को ही नहीं, बल्कि बस स्टैंड पर काम करने वाले कर्मचारियों को भी बहुत बुरे हालात का सामना करना पड़ता है। ऑफिस के कमरों की हालत इतनी खराब है कि कर्मचारियों को तिरपाल के नीचे काम करने को मजबूर होना पड़ता है। मानसून में पानी लीक होने से फाइलें और रिकॉर्ड रखना भी मुश्किल हो जाता है।

Also Read: आरा में अतिक्रमण मुक्त अभियान, सड़क किनारे कब्जे हटाए गए

रोज़ाना 13 रूट पर बसें चलती हैं
इसके बावजूद, यहां से रोज़ाना 12-13 सरकारी बसें अलग-अलग रूट पर चलती हैं, जिनमें भागलपुर, पटना, जमुई, लखीसराय और दूसरे ज़िलों की बसें शामिल हैं। यात्रियों का कहना है कि बसों की इतनी ज़्यादा संख्या होने के बावजूद बुनियादी सुविधाओं की कमी विभाग की गंभीर लापरवाही दिखाती है।

स्थानीय लोगों की नाराज़गी और विभाग का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि मौजूदा बिल्डिंग पूरी तरह से खराब हो चुकी है और इसे तोड़कर नया बस स्टैंड बनाना ही इसका एकमात्र हल है। लेकिन, विभाग अभी यात्रियों की सुविधाओं को नज़रअंदाज़ कर रहा है और सिर्फ़ बाउंड्री वॉल बनाने पर ध्यान दे रहा है, जो बिल्कुल भी प्रैक्टिकल नहीं है।

इस बारे में, एस्टैब्लिशमेंट सुपरिटेंडेंट विजय कुमार यादव का कहना है कि बस स्टैंड के सुधार के लिए DPR विभाग को सौंप दी गई है, और जल्द ही कंस्ट्रक्शन और अपग्रेड का काम शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, यात्रियों का कहना है कि ऐसी उम्मीदें कई सालों से जताई जा रही हैं, लेकिन ज़मीन पर कोई ठोस बदलाव नहीं दिख रहा है।

Join WhatsApp

Join Now

Join Telegram

Join Now

Leave a Comment